Thursday, November 20, 2008
बस का सफर सुहाना लगे
आप सभी लोग जानते होंगे की दिल्ली की बसों में सफर करना कितना कठिन और दुष्कर होता है /लेकिन वास्तव में ये सफर अविस्मरनीय होता है / एक दिन मैं दिल्ली की जान डीटीसी बस में सफर कर रहा था / पीछे बैठे एक व्यक्ति ने अपने साथी से बोला की कल युवराज की धुआंदार पारी ने दिल खुश कर दिया / इस पर उसके साथी ने जवाब दिया कि ये क्रिकेट वाले तुम्हें बेवकूफ बना रहे हैं , ये क्रिकेट तुम्हारी जेबों से पैसा खींचने का एक मध्यम है और कुछ नहीं / ये बात सुनकर मुझे बहुत दुःख हुआ / क्रिकेट और अन्य खेलों के बारे में ऐसी सोच रखने वाले शायद इस बात से अनजान हैं कि ये क्रिकेट ही है जो भारत जैसे विभिन्न धर्मो और जातियों के देश को एक सूत्र में बाँधने का काम करता है / भारत कि एकता और अखंडता कि बातें इतिहास से ही कि जाती रही हैं / लेकिन क्या वास्तव में भारत में क्रिकेट को छोड़कर कोई अन्य चीज़ है जो भारत को एक सूत्र में बाँधने का काम करती हो /आज भारत में धर्मं , जाति, लिंग ,संपत्ति, धन, दौलत आदि सभी भारत के लोगों को एक दूसरे से काटने का काम कर रहे हैं / समाज में अराजकता और तनाव पैदा कर रहे हैं / क्रिकेट इस तनाव को कम करने के लिए मनोरंजन का माध्यम तो है , साथ ही भारत कि राष्ट्रीय एकता का प्रतीक भी है / जिस तरह स्वतंत्रता से पहले गांधी जी ,सुभाष चंद्र बोस आदि महान नायकों ने देश को राष्ट्रीय स्तर पर एक करने और भारत को स्वतंत्र करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई , उसी तरह आज क्रिकेट भी भारत को राष्ट्रीय स्तर पर एक करने का अतुलनीय काम कर रहा है / आज जब देश में इंसान इंसान का दुश्मन बना हुआ है ,ऐसे में अगर क्रिकेट जैसा कोई खेल समाज में फैली अराजकता और तनाव को कम करने का काम करता है राष्ट्रीय एकता में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है तो उसकी सराहना करनी चाहिए / न कि उस पर पैसे कमाने का और लोगों को लूटने का आरोप लगाकर उसे लज्जित करना चाहिए /
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